उत्तर प्रदेश के झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई की विश्वासपात्र और उनकी महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति झलकारी बाई की जयंती को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। लोगों ने वीरांगना झलकारी बाई की 187 वीं जयंती पर कृतज्ञता के साथ उन्हें याद किया गया।
झलकारी बाई का जन्म 22 नवंबर 1830 में भोजला गांव में गरीब कोली परिवार में हुआ था। झलकारी बाई की वीरता के किस्से बुंदेलखंड के लोकगीतों और लोककथाओं में आज भी सुने जा सकते हैं। झलकारी बाई वीरता की एक मिसाल होने के साथ-साथ महारानी लक्ष्मीबाई की हमशक्ल भी थीं। अंग्रेज जब झांसी के किले में प्रवेश कर गए तब झलकारी बाई ने रानी से मिलती वेशभूषा धारण कर अंग्रेजों से मोर्चा लिया। इस बीच रानी लक्ष्मीबाई को अंग्रेजों के हाथ न लगने का अवसर मिला और वह सुरक्षित किले से बाहर निकल पायीं।
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