Hindi News : पुराणों और प्राचीन कथाओं में राधा-कृष्ण का विवाह हुआ था इसका वर्णन नहीं मिलता है। यही माना जाता है कि राधा, कृष्ण की प्रेमिका थीं और कृष्ण का विवाह रूक्मणी से हुआ था। आपको बता दें कि गर्ग संहिता में राधा-कृष्ण की सगाई का वर्णन मिलता है। गर्ग संहिता के अनुसार राधा-कृष्ण की सगाई हुई थी और इस सगाई में राधा के पिता वृषभानु ने भगवान कृष्ण को तोहफे में बेशकीमती मोती दिए थे।
इन मोतियों को तोहफे में पाकर वासुदेव बहुत परेशान हो गए, उन्हें ये डर सता रहा था कि इतने कीमती मोती वो कैसे संभालेंगे। श्रीकृष्ण अपने पिता की इस चिंता को भांप गए और उन्होंने अपनी मां से झगड़कर वे मोती ले लिए और कुंड के पास जमीन में गाड़ दिए। जब नंद बाबा को इस बात का पता चला तो वे अपने पुत्र पर बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने कुछ लोगों को वह मोती खोदकर लाने को कहा।
जब वे लोग जमीन को खोदकर मोती लाने के लिए उस स्थान पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि उस जगह पर पेड़ उग आया है और उस पेड़ पर सुंदर मोती लटक रहे हैं। तब एक बैलगाड़ी में भरकर मोतियों को नंदबाबा के घर पहुंचाया गया। तब से लेकर अब तक उस कुंड को मोती कुंड के ही नाम से जाना जाता है। 84 कोस की यात्रा करने वाले लोग इस कुंड और कुंड के पास लगे मोतियों के पेड़ को आसानी से देख सकते हैं।
ताजा हिंदी खबरो के लिए क्लिक करे Samachar Jagat पर
इन मोतियों को तोहफे में पाकर वासुदेव बहुत परेशान हो गए, उन्हें ये डर सता रहा था कि इतने कीमती मोती वो कैसे संभालेंगे। श्रीकृष्ण अपने पिता की इस चिंता को भांप गए और उन्होंने अपनी मां से झगड़कर वे मोती ले लिए और कुंड के पास जमीन में गाड़ दिए। जब नंद बाबा को इस बात का पता चला तो वे अपने पुत्र पर बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने कुछ लोगों को वह मोती खोदकर लाने को कहा।
जब वे लोग जमीन को खोदकर मोती लाने के लिए उस स्थान पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि उस जगह पर पेड़ उग आया है और उस पेड़ पर सुंदर मोती लटक रहे हैं। तब एक बैलगाड़ी में भरकर मोतियों को नंदबाबा के घर पहुंचाया गया। तब से लेकर अब तक उस कुंड को मोती कुंड के ही नाम से जाना जाता है। 84 कोस की यात्रा करने वाले लोग इस कुंड और कुंड के पास लगे मोतियों के पेड़ को आसानी से देख सकते हैं।
ताजा हिंदी खबरो के लिए क्लिक करे Samachar Jagat पर

No comments:
Post a Comment