महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद सभी पांडव खुशी पूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। एक दिन देवऋषि नारद मुनि महाराज युधिष्ठिर के सामने प्रकट हुए और कहा यहां आप तो खुस लग रहे पर क्या आप को पता है की स्वर्गलोक में आपके पिता बहुत दुखी है। जब युधिष्ठिर ने देवऋषि से इसका कारण पूछा तो वह बोले पाण्डु अपने जीते जी राजसूय यज्ञ कराना चाहते थे जो वे न कर सके इसी बात को लेकर वे दुखी रहते है, महाराज युधिष्ठिर ! आपको आपके पिता के आत्मा के शांति के लिए यह यज्ञ करवाना चाहिए।
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